Wednesday, July 22, 2020

Chemical Reactions (रासायनिक अभिक्रिया) : Types Of Chemical Reactions And Chemical Equation

रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction) :

18 वीं और 19 वीं शताब्दी में कुछ वैज्ञानिकों ने रासायनिक अभिक्रियायों के संदर्भ में बुनियादी प्रयोग किए। उन्होंने प्रायोगिक रूप से साबित किया कि रासायनिक अभिक्रिया के दौरान पदार्थ की संरचना बदल जाती है और यह परिवर्तन स्थायी होता है। इसके विपरीत, भौतिक परिवर्तन केवल स्थिति या पदार्थ के रूप में परिवर्तन है, और यह परिवर्तन अक्सर अस्थायी होता है।

                                                                        
अपने दैनिक जीवन में होने वाली कई घटनाओं में आपके द्वारा किए गए भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों के रिकॉर्ड का आप पता लगा सकते हैं। तापमान, दबाव जैसे मापदंडों में बदलाव के कारण भौतिक परिवर्तन होता है। अक्सर भौतिक परिवर्तन प्रतिवर्ती (reversible) होता है। भौतिक परिवर्तन पदार्थ के संगठन के समान ही होता है। जैसे जब बर्फ गर्म होती है, तो यह पानी में बदल जाती है, और जब पानी ठंडा हो जाता है, तो यह बर्फ में बदल जाता है। इसके विपरीत, किसी प्रक्रिया में किसी पदार्थ की संरचना में परिवर्तन को 'रासायनिक परिवर्तन' कहा जाता है। जब हम कहते हैं कि एक प्रक्रिया या घटना एक रासायनिक परिवर्तन है, तो कुछ रासायनिक प्रतिक्रियाएं संबंधित पदार्थ में होती हैं। रासायनिक अभिक्रिया वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा कुछ पदार्थों में रासायनिक बंध विभाजित होते हैं और नए रासायनिक बंध बनते हैं और वह पदार्थ नए पदार्थों में परिवर्तित हो जाते है।

'अभिकारक'(Reactant) :

आबंध (bond) विभाजन द्वारा रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों को 'अभिकारक'(Reactant) कहा जाता है। 

उत्पाद (products) :  

रासायनिक अभिक्रिया के परिणामस्वरूप, नए आबंध बनते हैं और नए बने पदार्थों को 'उत्पाद' कहा जाता है। 

उदाहरण के लिए, 
कार्बन डाइऑक्साइड गैस हवा में कोयले के दहन से बनती है।
C + O2 →  CO2
इस रासायनिक अभिक्रिया में कोयला (कार्बन) और ऑक्सीजन (वायु) अभिकारक  हैं, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड उत्पाद  है।

रासायनिक समीकरण (Chemical Equation) :

सबसे पहले हम एक अभिक्रिया देखते हैं,
सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) और कॉपर सल्फेट (CuSO₄) के जलीय विलयन में जो अभिक्रिया होती है उससे हमें कॉपर हाइड्रॉक्साइड (Cu(OH)₂) अवक्षेप तथा सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄) का विलयन मिलता है। तो हम इस अभिक्रिया को संक्षिप्त रूप में ऐसा लिखेंगे (नीचे इमेज में देखिए), 

तो उपर इमे में जो अभिक्रिया उसे हम शाब्दिक समीकरण कहेंगे। इसी तरह के शाब्दिक समीकरण अभी हम रासायनिक सूत्रों का उपयोग करके लिखेंगे,

NaOH   +   CuSO₄   →   Cu(OH)₂    +   Na₂SO₄

तो इस संक्षिप्त रूप को हम रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं।

रासायनिक समीकरण कैसे लिखते हैं?

अब हम रासायनिक समीकरण में जो संकेत लिखे जाते हैं, उन्हें एक-एक करके देखते हैं:
1. रासायनिक समीकरण लिखते समय, अभिकारक बाईं ओर और उत्पादों को दाईं ओर लिखते हैं। अभिकारक से उत्पाद तक का तीर दोनों के बीच खींचा जाता है। यह तीर रासायनि-क अभिक्रिया को इंगित करता हैं।

2. यदि दो या अधिक अभिकारक या उत्पाद हैं, तो उनके बीच अधिक (+) चिन्ह का उपयोग किया जाता है। जैसे पिछले  समीकरण में अभिकारकों NaOH और CuSO₄ के बीच अधिक (+) का चिन्ह दिखाया है। इसके अलावा Cu(OH)₂
और Na₂SO₄ उत्पादों के बीच अधिक (+) का चिन्ह दिखाया हैं।

3. रासायनिक समीकरणों को अधिक जानकारीपूर्ण बनाने के लिए, समीकरणों में अभिकारकों और उत्पादों की भौतिक अवस्थाओं का उल्लेख किया जाता है। उनके ठोस, द्रव और गैस अवस्थाओं को क्रमश (s), (l), (g) कोष्ठक में लिखते हैं। इसके अलावा, यदि यह एक गैसीय उत्पाद है, तो इसे (g) के बजाय एक ऊपर की ओर तीर द्वारा इंगित किया जा सकता है,"(↑)" और यदि यह एक अघुलनशील स्थिर रूप में बनता है, अर्थात, यदि यह एक अवक्षेपित रूप में बनता है, तो इसे (s) के बजाय नीचे इंगित किए गए तीर के संकेत से लिखा जा सकता है। यदि अभिकारक और उत्पाद जलीय विलयन के रूप में हैं, तो उन्हें जलीय विलयन कहा जाता है और उनके आगे के अक्षर (aq) उनके जलीय विलयन अवस्था को दर्शाते हैं। 
उपर दिए गए इन तीन नियमों के अनुसार हम कुछ उदाहरण देखते हैं,
(1) CuSO4(aq) + Zn(s) → ZnSO4(aq) + Cu(s) 
(2) CaCO3(s) → CaO(s) + CO2(↑)

संतुलित रासायनिक समीकरण :

जिस अभिकारकों में तत्वों के परमाणुओं की संख्या उत्पाद में उन तत्वों के परमाणुओं की संख्या के बराबर प्रतीत होती है, उन तरह के समीकरणो को 'संतुलित समीकरण' कहा जाता है। यदि प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या रासाय-  निक समीकरण के दोनों किनारों पर समान नहीं है, तो ऐसे समीकरण को 'असंतुलित समीकरण' कहा जाता है।

रासायनिक समीकरण संतुलित करने के चरण :
रासायनिक समीकरण संतुलित क्रमशः करते हैं और वह 'प्रयत्न व भूल' सिध्दांत से अच्छी तरह से किया जाता है। 
(1) सबसे पहले हम एक रासायनिक समीकरण लिखेंगे, 

NaOH   +  H2SO4   →   Na2SO4      +      H2O

(2) समीकरण की दोनों तरफ विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की संख्याओं की जाँच करें कि क्या समीकरण संतुलित है या नहीं। ऐसा लगता है कि दोनों तरफ के सभी तत्वों के परमाणु समान नहीं हैं। अर्थात्, समीकरण संतुलित समीकरण नहीं है।


(3) उस यौगिक से संतुलन समीकरण को शुरू करना सुविधा- जनक है जिसमें सबसे अधिक परमाणु हैं, और पहले उस तत्व पर भी विचार करना है जिसके परमाणु दोनों तरफ असमान हैं।


(i) Na2SO4 और H2SO4 इन दोनों यौगिकों में अधिकतम 7 परमाणु प्रत्येक हैं। इनमें से किसी को चुना जा सकता है। हम 
Na2SO4 इस यौगिक को चुनेंगे। संतुलन के लिए सोडियम का चयन करें क्योंकि यौगिक में सोडियम परमाणुओं की संख्या दो तरफ से असमान है। ध्यान दें कि परमाणुओं को संतुलित करते हुए यौगिकों का सूत्र नहीं बदलना चाहिए।
यानी कि , यहां सोडियम परमाणुओं की संख्या को दोगुना करने के लिए सूत्र NaOH को Na2OH में नहीं बदला जा सकता है। इसलिए NaOH को '2' यह गुणक लगाएंगे। अभी समीकरण हम फिरसे लिखेंगे,

2NaOH   +  H2SO4   →   Na2SO4    +   H2O



(ii) दोनों ओर ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के परमाणु अस-मान हैं, इसलिए समीकरण यह दर्शाता है कि यह संतुलित नहीं है। इनमें से हायड्रोजन के परमाणुओं को संतुलित करने के लिए छोटा गुणांक लगेगा इसलिए हम सबसे पहले हायड्रोजन को संतुलित करेंगे।



(iii) हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या को संतुलित करने के लिए गुणांक '2' को उत्पाद H2O पर लागू करें।

2NaOH   +  H2SO4   →   Na2SO4    +   2H2

अब दोनों तरफ की जांच करके हमने यह पाया कि दोनों तरफ के तत्वों के परमाणुओं की संख्या समान हैं। इसलिए यह
रासायनिक समीकरण संतुलित है।

रासायनिक अभिक्रियायों के प्रकार :

1. संश्लेषण अभिक्रिया (Combination Reaction) :

जब कोई अभिक्रिया दो या दो से अधिक अभिकारकों के रासायनिक संयोजन द्वारा एकही उत्पाद का निर्माण करती है, तो उस अभिक्रिया को संश्लेषण अभिक्रिया कहते हैं।
Eg:
  
2Mg      +     O2      →     2 MgO

उपर दिए गए अभिक्रिया में मॅग्नेशियम और ऑक्सीजन का संयोजन होकर सिर्फ मॅग्नेशियम ऑक्साइड यह एक ही उत्पाद तैयार हो रहा।

2. अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction) :

जब कोई अभिक्रिया में एक ही अभिकारक से दो या दो से अधिक उत्पाद मिलते हैं तो उस अभिक्रिया को हम अपघटन अभिक्रिया कहते हैं।
Eg:

2NaCl        →      2Na       +         Cl2

सोडिअम क्लोराइड का अपघटन करके सोडियम और क्लोरीन यह दो उत्पाद मिलते हैं।

3. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction) :

जब एक यौगिक में कम प्रतिक्रियाशील तत्व के आयन को अधिक प्रतिक्रियाशील तत्व के एक अन्य आयन द्वारा विस्था- पित किया जाता है, तो उस रासायनिक अभिक्रिया को 'विस्थापन अभिक्रिया' कहा जाता है।
Eg:

CuSO4(aq) + Fe(s) → FeSO4(aq) + Cu(s)

जब कॉपर सल्फेट के विलयन में लोहे की छोटी-छोटी कील रखी जाती है तो कॉपर सल्फेट का नीला रंग बदल कर हल्का हरा हो जाता है। ऐसा फेरस सल्फेट के निर्माण के कारण होता है। लोहे की कील पर भूरी (blur) परत के रूप में कॉपर हमें मिलता है।


4. दोहरी विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction) :


जब रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारक आयन का आदान-प्रदान करके अवक्षेप का निर्माण करते हैं, तब उस अभिक्रिया को दोहरी विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
Eg

 NaOH   +  H2SO4   →   Na2SO4    +   H2O


उपचयन और अपचयन अभिक्रिया (Oxidation & Reduction Reaction) : 

उपचयन अभिक्रिया (Oxidation Reaction) :

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अभिकारक ऑक्सीजन के साथ संयोजित होता है या वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें हाइड्रोजन का ह्रास जाता है और उत्पाद मिलता है। उसे उप- चयन अभिक्रिया कहते हैं। 
Eg:
(1) 2 Mg       +       O2     →       2MgO    
(2) MgH2                          Mg     +        H2

अपचयन अभिक्रिया (Reduction Reaction) :

जिस अभिक्रिया में अभिकारक हायड्रोजन प्राप्त करता है, उस अभिक्रिया को अपचयन अभिक्रिया कहते हैं। 
Eg :
 CuO   +     H2                     →         Cu     +   H2O