Friday, July 10, 2020

भारतीय संविधान की विशेषता और प्रमुख स्रोत

भारतीय संविधान की विशेषताएं
भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएं नीचे दिए गए मुद्दों से जानते हैं।


1.सबसे बडा लिखित संविधान:
भारत का संविधान एक लिखित घटना है, लिखित घटना एक विशिष्ट समय में लिखी जाती है। भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखीत संविधान हैं। अमेरिका का संविधान भी एक लिखित संविधान है जबकि ब्रिटेन का संविधान एक अलिखित संविधान है। भारत के मूल संविधान में एक प्रस्तावना, 22 भाग और 8 अनुसूचियां थी। वर्तमान में एक प्रस्तावना, 25 भाग और 22 अनुसूचियां हैं।

2.नम्य और अनम्य संविधान :
ऐसा माना जाता है कि भारत का संविधान नम्य और अनम्य रहना एक अच्छा उदाहरण हैं बाकी देशों के लिए। संविधान नम्य है कि अनम्य वह उसके संशोधन से पता चलता है। अनम्य संविधान का संशोधन करना कठिन होता है(अमेरिका का संविधान) बल्कि नम्य संविधान का संशोधन करना आसान रहता है। लेकिन भारत में यह दोनों संशोधन के मार्ग अपनाएँ जाते है। भारत में संविधान संशोधन का तरीका अनुच्छेद 368 में दिया गया है। 

3.संघीय व्यवस्था :
भारत के संविधान का झुकाव संघीय व्यवस्था की ओर है। जैसा कि भारत में दो सरकारे है, अधिकारों का विभाजन। संविधान में कहीं पर भी संघीय शब्द का प्रयोग किया नहीं है, लेकिन सिर्फ अनुच्छेद 1 में भारत का उल्लेख 'राज्यों का संघ' ऐसा किया है। 

4.संसदीय शासन व्यवस्था :
अमेरिका में अध्यक्षीय व्यवस्था है जबकि हमनें संसदीय शासन व्यवस्था ब्रिटेन के संविधान से ली गई है। संसदीय शासन व्यवस्था केंद्र और राज्य दोनों में हैं। संसदीय प्रणाली में राष्ट्रपति नाममात्र प्रमुख और वास्तविक प्रमुख प्रधानमंत्री वास्तविक प्रमुख रहता है। ऐसी ही प्रणाली राज्य में भी रहती है जिसमें नाममात्र प्रमुख राज्यपाल और वास्तविक प्रमुख मुख्यमंत्री रहते है। 

5. संसदीय सर्वोच्चता और न्यायिक सर्वोच्चता में समन्वय :
भारतीय संविधान कर्ताओं ने ब्रिटेन की संसदीय सर्वोच्चता और अमेरिका की न्यायिक सर्वोच्चता में समन्वय साधा है। क्योंकि भारत की न्यायिक समीक्षा शक्ति अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय से कम है, जबकि संसदीय प्रक्रिया भी ब्रिटेन से अलग है। 

6.स्वतंत्र न्यायिक प्रक्रिया :
भारत की न्यायिक प्रक्रिया को राजनीतिक हस्तक्षेप से अलीप्त रखा है। भारत की न्यायिक प्रक्रिया सबसे पहले स्थान पर सर्वोच्च न्यायालय आता है। मध्य स्तर पर उच्च न्यायालय आते हैं, और सबसे निचले स्तर पर अधीनस्थ न्यायालय आते हैं। सर्वोच्च न्यायालय यह संघीय न्यायालय है, शीर्ष न्यायालय भी है जो नागरिकको के मौलिक अधिकारों का रक्षण करता है।

7.मौलिक अधिकार :
संविधान के भाग 3 में छह मौलिक अधिकार दिए हैं, यह अधिकार है,
(1) समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18)
(2) स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22)
(3) शोषण के विरोध में अधिकार (अनुच्छेद 23-24)
(4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28)
(5) सांस्कृतिक और शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 29-30)
(6) संविधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)
यह अधिकार कार्यपालिका और विधायिका के मनमाने कानूनों के विरोध में दिए गए हैं। जब भी इन अधिकारों का हनन होता है तो आदमी सीधा सर्वोच्च न्यायालय जा सकता है। 

8.मौलिक कर्तव्य :
सबसे पहले जब संविधान लिखा गया तो उसमें मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख कहा पर भी नहीं था। बाद में स्वर्ण सिंह समिति के अनुसार 1976 में 42 वा संविधान संशोधन करके समाविष्ट किए गए। 2002 में फिर से 86 वा संविधान संशोधन करके एक और मौलिक कर्तव्य समाविष्ट किया गया। 
9.धर्मनिरपेक्ष राज्य :
भारत का संविधान किसी धर्म विशेष को धर्म के आधार विशेष मान्यता नहीं देता। 1976 में 42 वे संशोधन के तहत प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्ष शब्द शामिल किया गया। 

10.मतदान का अधिकार :
जिस व्यक्ति आयु 18 साल या उससे ऊपर है तो उसको लिंग,जात,धर्म  साक्षरता के आधार पर मतदान देने से कोई भी नहीं रोक सकता। 

11. एक ही नागरिकता :
अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे देश का निवासी हैं तो उसे भारत की नागरिकता चाहिए तो उस उसके देश की नागरिकता छोड़नी पडती है। और किसी भारतीय व्यक्ति को दूसरे देश की नागरिकता चाहिए तो उसे भारत की नागरिकता छोड़नी पडती है। 

12.आपातकालीन प्रावधान :
आपातकालीन प्रावधानों को संविधान में शामिल करने का मकसद यही है कि देश की अखंडता, संप्रभुता, एकता, सुरक्षा और संविधानिक ढांचा सुरक्षित रहे। 
आपातकाल के प्रकार :
1.राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352)
2.राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356 और अनुच्छेद 365)
3.वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360)

13.तीन स्तर की शासन व्यवस्था का प्राावधान :
मूल संविधान में दो तरह की शासन व्यवस्था थी एक राज्य शासन और दूसरा केंद्र शासन। बाद में 1992 में पी.व्ही. नरसिंहराव के सरकार ने 73 वा और 74 वा संविधान संशोधन करते हुए तीन स्तर सरकार का प्रावधान किया जो किसी भी देश के संविधान में नहीं है। 


भारतीय संविधान के प्रमुख स्रोत :
भारत के संविधान का कुछ भाग विश्व के कई देशों से लिया गया है। अधिकांश भाग 'भारत शासन अधिनियम 1935' से लिया गया है। नीचे दिए गए महत्वपूर्ण भाग अलग अलग देशों से लिए गए हैं,
1.अमेरिका :
मौलिक अधिकार(भाग 3 या सूची 3), न्यायिक सर्वोच्चता, न्यायिक पुनर्विलोकन, उपराष्ट्रपती पद, महाभियोग की प्रक्रिया, न्यायाधीशों की हटाने की प्रक्रिया, वित्तीय आपातकाल, 

2.आयरलैंड : 
राज्य के नीति-निदेशक सिध्दांत, राष्ट्रपति का चुनाव, राष्ट्रपति व्दारा राज्यसभा में 12 सदस्यों का नामनिर्देशन 

3.ब्रिटेन :
 संघीय सरकार, संसदीय शासनव्यवस्था, एक नागरिकता, संसद के विशेषाधिकार, राष्ट्रपति की क्षमादान व्यवस्था 

4.कनाडा :
संघीय शासन व्यवस्था के प्रावधान, विशिष्ट शक्ति केंद्र के पास

5.पूर्व सोवियत संघ :
मौलिक कर्तव्य 

6.जर्मनी :
आपातकाल के समय राष्ट्रपति के अधिकार

7.दक्षिण आफ्रिका :
संविधान संशोधन की प्रक्रिया, राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव 

8.ऑस्ट्रेलिया :
समवर्ती सूची, प्रस्तावना की भाषा, लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक, 
9.जापान :
विधि द्वारा निर्मित की गई प्रक्रिया 










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