भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र (Sectors Of Indian Economy) :
दोस्तों भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत ही बड़ी अर्थव्यवस्था है, और विश्व की टॉप 10 अर्थव्यवस्थाओं में से एक है इसीलिए यह जानना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि इसके अलग-अलग क्षेत्रों के बारे, की क्या योगदान है उन क्षेत्रों का हमारी अर्थव्यवस्था में। इसलिए आज हम अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के बारे में जानकारी लेने वाले हैं। कोई भी अर्थव्यवस्था विभिन्न क्षेत्रों से बनी होती है। अर्थव्यवस्था के ऐसे क्षेत्रों को दो आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है।
A. व्यवसाय के अनुसार अर्थव्यवस्था के क्षेत्र:
निम्नलिखित व्यवसाय पर आधारित अर्थव्यवस्था के क्षेत्र के पाँच प्रकार (मुख्यतः तीन ही प्रकार है लेकिन कई पुस्तकों में इन्हें पांच प्रकारो में बांटा हैं) पाए जाते हैं। :
1. प्राथमिक क्षेत्र(Primary Sector) :
प्राथमिक क्षेत्र का मतलब है, ऐसे कार्य जो प्राकृतिक रूप से जुड़े हुए हैं, और पहले पायदान पर आते हैं। मुख्य रूप से जो भारतीय अर्थव्यवस्था है उसका बहुत बड़ा भाग प्राथमिक क्षेत्र में कार्य करता है। इस क्षेत्र में कृषि और कृषि से संबंधित व्यवसाय (पशुपालन, मत्स्य पालन, रेशम उत्पादन), वन संसाधन, खनन और खनिज उत्पादों (कोयला, पेट्रोलियम, लौह अयस्क, आदि का खनन) से संबंधित प्राकृतिक संसाधनों गतिविधियां शामिल हैं। प्राथमिक क्षेत्र को 'कृषि और संबद्ध क्षेत्र' के रूप से भी जाना जाता है।
2. द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector):
द्वितीयक क्षेत्र में ऐसे क्रियाकलाप आएंगे जो कृषि पर आधारित हो, या फिर वस्तुओं के निर्माण को हम द्वितीय क्षेत्र में रखते हैं। इस क्षेत्र को 'औद्योगिक क्षेत्र' के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि यह प्राथमिक क्षेत्र से प्राप्त उत्पादों को संसाधित करके अन्य प्रकार के माल का उत्पादन करता हैं। इस क्षेत्र में विनिर्माण, निर्माण, बिजली उत्पादन, जल आपूर्ति आदि जैसे उद्योग शामिल हैं।
3. तृतीयक क्षेत्र (Tertiary Sector) :
तृतीयक क्षेत्र में हम द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र में जो सेवा प्रदान करने की जरूरत होती है, उसको रखते हैं। तृतीयक क्षेत्र और द्वितीयक क्षेत्र दोनों ही प्राथमिक क्षेत्र पर निर्भर है। तृतीयक क्षेत्र यह तो बना ही है प्राथमिक और द्वितीयक के लिए। इस क्षेत्र में विभिन्न सेवाएं शामिल हैं जो प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रों के पूरक हैं, इसलिए इस क्षेत्र को 'सेवा क्षेत्र' भी कहा जाता है। वर्तमान में तृतीयक क्षेत्र सबसे तीव्र गति से विकास करने वाला है क्षेत्र हैं।
4. चतुर्थ क्षेत्र (Quaternary Sector) :
इस क्षेत्र में ऐसे व्यवसाय शामिल हैं जिनमें उच्च बौद्धिक क्षमता का उपयोग किया जाता है। इस तरह के व्यवसाय उच्च ज्ञान से संबंधित हैं और अवधारणाओं के निर्माण, अनुसंधान और विकास से संबंधित हैं।उदा:अनुसंधान और विकास, आईटी सॉफ्टवेयर विकास
5. पंचक क्षेत्र :
कुछ विशेषज्ञ पंचक क्षेत्र को चतुर्थक क्षेत्र का ही हिस्सा मानते हैं। पंचक क्षेत्रों में समाज और अर्थव्यवस्था के उच्चतम स्तरों पर निर्णय लेने की प्रक्रियाएं शामिल हैं, जिनमें सरकार, विज्ञान, विश्वविद्यालयों, गैर-सरकारी संगठनों, स्वास्थ्य सेवा, संस्कृति, मीडिया आदि के क्षेत्रों से उच्च-स्तरीय कार्यकारी निदेशक और अधिकारी शामिल हैं।भारतीय अर्थव्यवस्था के मुख्य तो तीन ही क्षेत्र माने जाते हैं, लेकिन कई पुस्तकों में अन्य दो क्षेत्र भी दिए हैं जो हमनें ऊपर देखें।
B.स्वामित्व के अनुसार अर्थव्यवस्था के क्षेत्र:
1. सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) :
सभी सरकारी स्वामित्व वाले उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र के नियंत्रण में हैं। सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम सरकार द्वारा चलाए जाते हैं।उदाहरण के लिए, रेल्वे, हथियार, टेलीविजन, पेट्रोलियम
2. निजी क्षेत्र (Private Sector) :
निजी क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें उद्योगों और व्यवसायों को एक निजी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा स्वामित्व और नियंत्रित किया जाता है। व्यक्तिगत लाभ निजी क्षेत्र का मूल लक्ष्य है।उदाहरण के लिए, कृषि और संबद्ध उद्योग, लघु उद्योग, थोक और खुदरा व्यापार, आदि।
3. संयुक्त क्षेत्र (Joint Sector) :
इस क्षेत्र के उद्योग और व्यवसाय संयुक्त रूप से सरकार के साथ-साथ निजी व्यक्तियों या समूहों के स्वामित्व, प्रबंधित और नियंत्रण में रहते हैं।4. सहकारी क्षेत्र (Cooperative Sector) :
इस क्षेत्र में सहकारी आधार पर स्थापित संगठन / उद्योग शामिल हैं। सहकारी क्षेत्र को निजी क्षेत्र का एक उपप्रकार माना जाता है। सहकारी स्वामित्व निजी है लेकिन व्यक्तिगत के बजाय समूह की रहतीं हैं। सहकार पूंजीवाद और समाजवाद का स्वर्णिम माध्यम है। सहकारिता की ख़ासियत यह है कि सहकारी सदस्यों द्वारा लाए गए पूंजी की परवाह किए बिना 'एक सदस्य एक वोट' के सिद्धांत द्वारा शासित होते हैं।
तृतीय क्षेत्र के तीव्र गति से विकसित होने के कारण यानी कि ऐसा क्यों है कि तृतीयक क्षेत्र बहुत ही तीव्र गति से विकसित हो रहा:
जो उपरोक्त सेवाएं हैं उनकी जिम्मेदारी सरकार उठाती है यानी जो सारी चीजें हैं ना यहां पर यह सारी चीजों का जो जिम्मा है वह सरकार उठाती है। इसलिए इसमें रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं, क्योंकि कोई एक व्यक्ति नहीं कर रहा है यह बल्कि सरकार कर रही है। तो इसमें रोजगार का सृजन हो रहा है। दूसरी बात यह कि प्राथमिक और द्वितीयक दोनों क्षेत्रों के विकास से सेवा की मांग में वृद्धि होती है।
आप निचे दिए उदाहरणों के अंतर्गत इस बात को बहुत ही साधारण तरीके से समझ सकते हैं।
1. किसी किसान ने उत्पादन किया और उत्पादन आवश्यकता से अधिक हुआ तो वह किसान किसी को तो बेचेगा और बेचकर वह अपने भोग विलास की कोई वस्तु खरीदेगा। या नहीं भी खरीदेगा तो कहीं ना कहीं जाएगा आएगा उसमें वह अपने धन का उपयोग करेगा।
2.व्दितीयक क्षेत्र में ऐसे मान लीजिए कि किसीने बहुत लंबे समय तक कार्य किया और करोड़ों रुपए कमाए अब वह क्या करेगा कि काम करने के बाद आराम करने की कोशिश करेगा। तो कुछ दिनों के लिए वह फैमिली के साथ या अकेला छुट्टी पर जा सकता है। वह होटल में जाएगा, अच्छी जगह घूमेगा इससे यह पता चलता है कि वह सेवा की डिमांड कर रहा है।
3.आय बढ़ने के साथ लोग अन्य सेवाओं जैसे रेस्टोरेंट, पर्यटन, शॉपिंग, निजी अस्पताल, स्कूल एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण इत्यादि में गुणवत्ता में सुधार की लोग मांग करते हैं और अधिक धन देने को तैयार हो जाते हैं।
4.संचार और सूचना का विकास होने से सेवा क्षेत्र में बहुत विकास हुआ है आज लोग घर बैठे टिकट बुक करा सकते हैं, टिकट आपके घर पर आ जाएंगे। आप घर बैठे खाना मंगवा सकते हैं। आप घर बैठे कुछ भी मंगवा सकते हैं। इन सभी कारणों की वजह से ही सेवा क्षेत्र बहुत तेजी से विकसित हो रहा है।
जनसंख्या की संलग्नता (Population Engagement) :
हमारे देश की कितनी जनसंख्या किस किस भाग में कार्यरत है, या फिर किस क्षेत्र में सबसे अधिक कार्यरत हैं यह जानना बहुत जरूरी है। देश में 2007 के आंकड़ों के अनुसार लगभग 72% लोग कृषि और उससे संबंधित क्रियाकलाप यानी पशुपालन और अन्य क्रियाकलापों से जुड़े हुए थे। वहीं पर 2017 के आंकड़ों के अनुसार लगभग 60% लोग कृषि और उससे संबंधित कार्य में लगे हुए थे। वहीं द्वितीयक क्षेत्र कि बात करें तो 2007 में लगभग 10% लोग इस क्षेत्र में लगे हुए थे। वहीं 2017 में द्वितीय क्षेत्र में इजाफा हुआ है, 7% इजाफा होकर यह संख्या 17% हो गई। तृतीयक क्षेत्र में 2007 में 18% लोग कार्य कर रहे थे। वहीं पर यह आंकड़ा 2017 में 22% के आसपास हो गया था। वर्तमान समय में यह आंकड़ा 30% से ऊपर चला गया हैं। तो इस प्रकार से आप तुलना करके देख सकते हैं कि किस प्रकार से प्राथमिक क्षेत्र से संक्रमण हो रहा है द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र में।
जीडीपी (GDP) में योगदान :
जीडीपी में किस क्षेत्र का कितना योगदान है?प्राथमिक यानी कि कृषि और उसके संबंधित क्षेत्र का जीडीपी में एक चौथाई यानी कि 25% हिस्सा हैं। जबकि द्वितीयक और तृतीयक इन दोनों का 75% हिस्सा हैं।
प्राथमिक क्षेत्र में लोग ज्यादा जरूर काम कर रहे हैं लेकिन वहां पर आय उतनी नहीं है जितनी तृतीयक और द्वितीयक क्षेत्र में हैं। लोगों की जनसंख्या का बड़ा भाग प्रथम क्षेत्र में कार्यरत है परंतु जीडीपी में कुछ ज्यादा योगदान नहीं हैं। इसका मुख्य कारण यह भी है कि प्रच्छन्न बेरोजगारी यानी कि 60% लोग आज के समय में खेती में लगे हुए हैं फिर भी अर्थव्यवस्था में उनका जो योगदान है वह मात्र 25%। यह तो सोचने वाली बात है। यानी खेती बहुत पिछे चल रही है हमारी और सेवा क्षेत्र बहुत आगे निकल गया हैं।



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