Thursday, July 30, 2020

Biology Quiz No.2 (हिंदी में)

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Biology Quiz No.2



1. विटामिन शब्द का प्रयोग सबसे पहले किसने किया था?




... Answer is C)
फासिमिर फंक



2. बेरी-बेरी रोग किस विटामिन की कमी से होता हैं?




... Answer is B)
विटामिन B1



3. चिकित्साशास्त्र के विद्यार्थियों को किसकी शपथ दिलाई जाती हैं?




... Answer is B)
हिप्पोक्रेटस



4. परिस्थितिकी जीव विज्ञान की एक शाखा है जिसमें किस विषय का अध्ययन किया जाता है?




... Answer is C)
पर्यावरण का



5. (a) 'जीव विज्ञान का जनक' यह उपमा अरस्तू को दी गई थीं।
   ( b) 'वनस्पती विज्ञान का जनक' थियोफ्रेस्टस को कहा जाता हैं।




... Answer is A)
(a) और (b) दोनों सही



6.किस कारण से फूलों में रंग होता हैं?




... Answer is D)
एंथोसाइनिन



7. प्रकाश संश्लेषण क्रिया में कौन-सी गैस का पौधों व्दारा उपयोग किया जाता हैं?




... Answer is B)
कार्बन डायऑक्साईड



8. इन्सुलिन की कमी के कारण कौन-सा रोग होता हैं?




... Answer is D)
मधुमेह



9. (a) फूलों का अध्ययन करना जीव विज्ञान के एन्थोलॉजी शाखा में आता हैं।
   (b) कीटों का अध्ययन करना जीव विज्ञान के एण्टोमोलॉजी शाखा में आता हैं।




... Answer is B)
(a) और (b) दोनों सही



10. विटामिन A का रासायनिक नाम क्या हैं?




... Answer is A)
रेटिनाॅल



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Chemistry Quiz No.1 (हिंदी में)

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Chemistry Quiz No.1



1. किस गैस को लाफिंग गैस के नाम से भी जाना जाता हैं?




... Answer is A)
नाइट्रस अॉक्साईड



2. टमाटर के रस के pH का मान कितना हैं?




... Answer is B)
4 - 4.4



3. (a) LPG गैस में ब्युटेन और प्रोपेन इन दोनों गैस शामिल होती हैं।
   (b) फल पकने में मिथीलीन गैस का प्रयोग किया जाता हैं।




... Answer is D)
(a) सही और (b) गलत



4. पृथ्वी की पपड़ी के विशुद्ध रुप में कौन-सी धातु पायी जाती हैं?




... Answer is B)
प्लेटिनम



5. चुने के जल (Lime Water) में कौन-सा पदार्थ होता हैं?




... Answer is D)
कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड



6. हाइड्रोक्लोरिक आम्ल (HCL) के जलीय विलयन का pH कितना होता हैं?




... Answer is B)
2



7. कैंसर के इलाज में निम्न में से किस पदार्थ का उपयोग किया जाता है?




... Answer is D)
कोबाल्ट-60



8. समुद्री जल से नमक किस पध्दति के व्दारा तैयार किया जाता हैं?




... Answer is C)
बाष्पीकरण



9. निम्न में से सबसे कठोर पदार्थ कौन-सा हैं?




... Answer is A)
हिरा



10. सिगरेट जलानेवाले लाईटर में किस गैस का प्रयोग किया जाता हैं?




... Answer is A)
ब्युटेन



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Wednesday, July 29, 2020

Physics Quiz No.1(हिंदी में)

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Physics Quiz No.1



1.हम जो कार्य करते है उसका मानक क्या होता है?




... Answer is A)
ज्यूल



2.विश्व के सभी देशों ने SI(System International) इस मानक प्रणाली को कब अपनाया?




... Answer is C)
1967



3. (a) न्यूटन के प्रथम गति के नियम को हम लोग गैलिलियो का नियम भी कहते हैं।
    (b) ऊँचाई पर स्थित वस्तु जैसे, स्प्रिंग, बाँध बनाकर रोके गए जल आदि में हमें स्थितीज ऊर्जा मिलती हैं।




... Answer is A)
(a) गलत और (b) सही



4. वायूमंडलीय दाब किस यंत्र के सहायता से मापा जाता हैं?




... Answer is B)
बैरोमीटर



5. जिस यंत्र के सहायता से समुद्र की गहराई मापी जाती हैं, उस यंत्र को क्या कहते हैं?




... Answer is C)
फैदोमीटर



6. न्यूटन के पहले नियम से हमें किसकी परिभाषा मिलती हैं?




... Answer is D)
बल की



7. (a) समृद्ध युरेनियम जो है वह युरेनियम-235 के समस्थानिक में समृद्ध किया जाता हैं।
   (b) रेडिओ- कार्बन काल निर्धारण तकनीक का उपयोग मुख्यतः जीवाश्मों की आयु का पता लगाने के लिए करते हैं।




... Answer is C)
(a) और (b) दोनों सही



8. निम्नलिखित द्रवो में उष्मा का सबसे अच्छा चालक कौन-सा है?




... Answer is C)
पारा



9. हमें बर्फ पर चलना यह प्रदर्शित करता है कि तनाव बढ़ाने पर बर्फ का गलनांक-




... Answer is B)
घट जाता है



10. (a) कोई भी साईकिल चलानेवाला किसी मोड पर घुमता है, तो वह बाहर की ओर झुकता है।
      (b) किसी भी वास्तविक वस्तु का आभासी प्रतिबिंब समतल दर्पण से बनता हैं।




... Answer is A)
(a) गलत और (b) सही



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Monday, July 27, 2020

Introduction Of Indian Geography In Hindi : भारत का स्थान,विस्तार और सीमाएं (भारत का भूगोल)

हमारी मातृभूमि भारत, भौगोलिक और ऐतिहासिक रूप से एक महान देश है। यह प्राचीन काल से अपनी सांस्कृतिक और व्यावसायिक समृद्धि के लिए जाना जाता है। मूल द्रविड़ों के साथ आर्यों के एकीकरण के कारण कुलीन भारतीय संस्कृति का उदय हुआ। 8 वीं शताब्दी में अरबों और 12 वीं शताब्दी में तुर्की के बाद, यूरोपीय व्यापारी 15 वीं शताब्दी के अंत में यहां पहुंचे। भारत विविधता का देश है। भारत विशाल है और भौगोलिक विविधता की एक विस्तृत विविधता है। हम इसके प्रतिबिंब को विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों के रूप में देख सकते हैं। भारत उत्तर में बर्फ से ढके हिमालय से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। भारत में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन हैं। जैसे  धूप, उपजाऊ मिट्टी, पानी, खनिज, वनस्पति, जीव-जंतु, आदि। इन सभी ने हमारी मातृभूमि की प्रगति में योगदान दिया है।
लगभग डेढ़ सदी से, भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था। 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिली। स्वतंत्रता के बाद के पहले बीस वर्षों में तीन युद्धों, दुनिया के कई हिस्सों में सूखे का सामना करने के बावजूद भारत दुनिया के प्रमुख विकासशील देशों में से एक है। भारत को आज एक प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्था के रूप में भी जाना जाता है।  विभिन्न चरणों में आर्थिक सुधारों ने भारत के आर्थिक विकास को गति दी है। भारत में युवाओं की आबादी अधिक है। भारत को एक युवा देश के रूप में देखा जाता है, क्योंकि यह एक कार्य आयु वर्ग है और विश्व में किसी भी देश में इतने युवा पाए नहीं जाते।



स्थान, विस्तार और सीमा :

स्थान :

  • भारत गणराज्य की राजधानी का नाम - नई दिल्ली
  • भारत उत्तरी और पूर्वी गोलार्ध में पृथ्वी पर स्थित है।
  • यह एशियाई महाद्वीप के दक्षिणी भाग में स्थित है।
  • भारत का स्थान 8°4′ उ. से लेकर 37°6′ उ. अक्षांश और 68°7′ पू. से लेकर 97°25′ देशांतर के बीच हैं।
  • भारत का सबसे उत्तरतम बिंदु इंदिरा कॉल (37°6' उ. अक्षांश) है जो जम्मू-कश्मीर में आता है।
  • 'इंदिरा प्वाइंट'(6°45' उ. अक्षांश) भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु है जो अंडमान निकोबार में आता है।
  • 2004 में जो सुनामी आई थी उसके बाद इंदिरा प्वाइंट जलमग्न हो चुका है।
  • बात करे भारत के पश्चिमी बिंदु की तो भारत का सबसे पश्चिमी बिंदु गुहार मोती (68°7' पू. देशांतर) है जो गुजरात में पडता है।
  • भारत का सबसे पूर्वी बिंदु है किबिथु ( 97°25' पू. देशांतर) जो अरुणाचल प्रदेश में पडता है।
  • इंदिरा पॉइंट की विषुवत रेखा से दूरी 876 किलोमीटर है।

विस्तार :

  • भारत का क्षेत्रफल 32,87,263 हैं जो कि विश्व के क्षेत्रफल का 2.4% हिस्सा हैं।



  • क्षेत्रफल के दृष्टी से पहले सात देश,                                              
         1.रुस
         2.कनाडा
         3.चीन
         4.अमेरिका
         5.ब्राझिल
         6.ऑस्ट्रेलिया 
         7.भारत
  • भारत की लोकसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 121 करोड़ है जो विश्व के जनसंख्या का 17.5% हैं। जनसंख्या के मामले में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है।
  • भारत का उत्तर से दक्षिण तक विस्तार 3214 किलोमीटर है और पूरब से पश्चिम तक विस्तार 2933 किलोमीटर हैं।
  • कर्क रेखा भारत के मध्य से गुजरती है और जब कर्क रेखा गुजरती है तो वह लगभग दो बराबर भागों में बांटती है। इससे भारत का दक्षिणी भाग उष्ण कटिबंध में आता है और उत्तरी भाग जो है वह शीतोष्ण कटिबंध में हैं।
  • कर्क रेखा भारत के 8 राज्यों से गुजरती है,जिनमें गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मिजोरम आते हैं।

मानक याम्योत्तर :

मानक याम्योत्तर यानी इंडियान स्टैंडर्ड टाइम लाइन इलाहाबाद (UP) के मिर्जापुर से गुजरती हैं। देशांतर के नजरिए से देखे तो 82°5' पू. देशांतर से गुजरती हैं जो ग्रीनविच रेखा से 5 घंटे 30 मिनट आगे हैं।
भारत कि मानक याम्योत्तर रेखा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगड, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश इन पांच राज्यों से गुजरती हैं।

मानक याम्योत्तर ग्रीनवीच रेखा से आगे क्यू है? 
पृथ्वी पर भारत की स्थिति उत्तर पूर्व है और हमें सबको पता है कि सूरज पूरब में उगता है और पश्चिम में ढलता है। यानी जो देश पूरब में स्थित होंगे वहां पर सूर्योदय पहले होगा और पश्चिम में स्थित देशों में सूर्यास्त बाद में होगा। तो भारत जीरो डिग्री देशांतर के पूरब में पड़ रहा हैं तो पूरब में स्थित होने के कारण भारत में सूर्योदय जीरो डिग्री से पहले हो जाएगा। यानी भारत का समय जीरो डिग्री के समय से आगे चलेगा या पहले चलेगा।

सीमाएं :

भारत की कुल स्थलीय सीमा 15200 किलोमीटर है और कुल तटीय सीमा है वह 7516.6 किलोमीटर है।

भारत की भू सीमाएं :
  • भारत कि आंतरराष्ट्रीय भूमी सीमा 7 देशों के साथ है। इसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, नेपाल, म्यांमार और बांग्लादेश शामिल हैं।
  • भारत की सीमाएँ किस देश के साथ कितनी है वह निम्न में देखते हैं,
    1)बांग्लादेश- 4096.7 किलोमीटर
    2)चीन- 3888 किलोमीटर
    3)पाकिस्तान- 3323 किलोमीटर
    4)नेपाल- 1751 किलोमीटर
    5)म्यांमार - 1643 किलोमीटर
   6)भूटान- 699 किलोमीटर
   7)अफगानिस्तान- 106 किलोमीटर

  • भारत की सबसे बड़ी सीमा बांग्लादेश के साथ है, जो 4096.7 किलोमीटर की है।
  • सबसे कम सीमा अफगानिस्तान साथ लगती है जो 106 किलोमीटर है।
  • बांग्लादेश और त्रिपुरा के बीच जो सीमा है उसे को जीरो लाईन कहा जाता हैंं। 
  • भारत और चीन के बीच की सीमा को मैकमहोन लाईन कहा जाता हैं।
  • भारत और पाकिस्तान की बीच के सीमा को रेडक्लिफ लाइन कहा जाता हैं।
  • भारत और अफगानिस्तान के बीच की सीमा को डूरण्ड लाईन के नाम से जाना जाता हैं।

भारत की समुद्री सीमाएँ :
भारत के पश्चिम और दक्षिण पश्चिम में अरब सागर है। पूर्व और दक्षिण पूर्व में बंगाल की खाड़ी है। दक्षिण में हिंद महासागर है। कन्याकुमारी भारतीय प्रायद्वीप का दक्षिणी सिरा है। श्रीलंका और भारत के बीच मन्नार की खाड़ी और पाख की खाडी हैं। भारत की पाकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव, इंडोनेशिया, बांग्लादेश और म्यांमार के साथ समुद्री सीमाएँ जुड़ी हुई हैं।

चैनल्स :

1)10° चैनल :

यह चैनल अंडमान और निकोबार को अलग-अलग करता है।

2) 9° चैनल :

यह चैनल लक्ष्यदीप और मिनिकॉय को अलग करता है। 

3) 8° चैनल :

यह चैनल मिनीकॉय और मालदीव के बीच हैं, लेकिन मिनीकॉय भारत कि ही भाग होने के कारण हम इसे भारत और मालदीव के बीच का चैनल ऐसे भी कह सकते हैं। 

4) ग्रेट चैनल :

यह चैनल निकोबार (भारत) और इंडोनेशिया का सूमात्रा द्वीप के बीच में स्थित हैं। 

5) कोको स्ट्रेट :

यह चैनल कोको द्वीप और उत्तरी अंडमान के बीच स्थित हैं। कोको द्वीप मुख्यतः म्यांमार का भाग है। इसलिए हम इसे भारत और अंडमान के बीच का भाग भी कह सकते हैं। 

6) डंकन पास :

यह चैनल दक्षिणी अंडमान और लघु अंडमान के बीच स्थित हैं। 







Sunday, July 26, 2020

प्राचीन भारत : Indus Valley Civilisation- सिंधु सभ्यता की खोज एंव विशेषताएं

सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilisation) :

हम लोगों को पता है कि विश्व की प्राचीन सभ्यताओं में से एक सिंधु घाटी सभ्यता भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता है। इस सभ्यता के जानकारी से पहले वैदिक सभ्यता को ही हम सबसे प्राचीन सभ्यता के रूप में मानते थे। नतीजा ये हुआ कि ब्रिटिश काल में इसे विभिन्न स्तरों पर खोजने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई और जब इस सभ्यता का पता चला तो यह ज्ञात हुआ कि यह भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता है। ना केवल यह भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता है बल्कि विश्व की प्राचीन चार महत्वपूर्ण सभ्यताओं में से एक है जिसमें हम लोग नील नदी की सभ्यता जिसे मिस्र की सभ्यता के नाम से जाना जाता है, मेसोपोटामिया की सभ्यता, चीन की सभ्यता और भारत की सभ्यता जिसे हम लोग सिंधु घाटी सभ्यता के नाम से भी जानते हैं।


सिंधु सभ्यता की खोज :

ब्रिटिश काल के  एक व्यक्ति जिनका नाम था चार्ल्स मैसन, इन्होंने पाकिस्तान (तब यह जगह भारत में थी) क्षेत्र का दौरा किया और हड़प्पा क्षेत्र के संबंध में इन्हें कुछ जानकारी मिली। उन्होंने यह अनुमान लगाया कि इस क्षेत्र में कोई सभ्यता है, यह घटना 1826 की है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया था कि यहां पर कोई सभ्यता है। उन्होंने एक पत्रिका निकाली थी जिसका नाम था 'नैरेटिव ऑफ जर्नीज' और इसी पत्रिका में उन्होंने इसके विषय में जानकारी पहली बार व्यक्त की थी जो धीरे-धीरे फैलनी शुरू हो गई।
इसके बाद की एक घटना है बर्टन बंधुओं के संबंध में। 1856 के आसपास में पाकिस्तान के दो क्षेत्र कराची और लाहौर के बीच रेलवे लाइन बन रही थी। इस रेलवे लाइन के निर्माण के क्रम में दो इंजीनियर थे, वे दोनों भाई थे और इनका नाम था बर्टन बंधु, एक का नाम था जेम्स बर्टन और दूसरे का नाम था विलियम बर्टन। तो जेम्स बर्टन और विलियम बर्टन के नेतृत्व में जब रेलवे की पटरी बनाने का काम हो रहा था इस दौरान उन्हें वहा के टीलों से इटे प्राप्त होनी शुरू हुई। इन ईटों को इन्होंने बड़ी आसानी से प्राप्त करके पटरीओं पर बिछाने के क्रम में लगा दिए। नतीजा यह निकला कि उस समय उन्हें ज्ञात हुआ कि यहां कोई पुराने घर रहे होंगे। लेकिन यह किसी सभ्यता का अंग है यह इनको भी पता नहीं चला और इस संबंध में उन्होंने ज्यादा शोध करने का प्रयास नहीं किया।
पहली बार यहां अगर किसी ने शोध करने का प्रयास किया तो वे थे अलेक्जेंडर कनिंघम। 1853 से 1856 के बीच में इन्होंने कई बार इस हडप्पा क्षेत्र का दौरा किया और इस क्षेत्र में जाकर के इसके संबंध में जानकारी इकट्ठा करने का प्रयास किया। लेकिन यह भी उतने सफल नहीं हो सके जितनी सफलता की आवश्यकता थी अर्थात यह पूरी तरह से व्यवस्थित रूप से इस सभ्यता के बारे में जानकारी नहीं दे सके।
सर जॉन मार्शल 1921 में भारत के पुरातात्विक विभाग के हेड थे और इन्हीं के नेतृत्व में इस क्षेत्र में खुदाई का कार्य प्रारंभ हुआ। खुदाई करने वाले दो भारतीय नेतृत्व करता थे जिनका नाम था दयाराम साहनी और दूसरे थे राखलदास बनर्जी। दयाराम साहनी के नेतृत्व में हड़प्पा और राखलदास बनर्जी के नेतृत्व में मोहनजोदड़ो की खोज की गई। इस तरह से इन्हें ही सर्वाधिक प्रारंभिक खोज कर्ताओं का श्रेय दिया जाता है।

सिंधु सभ्यता का तिथि निर्धारण :

सिंधु घाटी सभ्यता के संबंध में जितनी भी जानकारियां प्राप्त हुई है वह मुक्त पुरातात्विक स्रोतों पर आधारित है। किसी भी प्रकार के लिखित स्रोत को यहां पढ़ा नहीं जा सका है। परिणाम स्वरुप अलग-अलग जो खोजकर्ता थे जैसे सर जॉन मार्शल, डीपी अग्रवाल, चाइल्ड, इन सभी ने अपने-अपने अनुसार इस तिथि को क्रम देना शुरू किया।
सबसे पहला तिथि क्रम सर जॉन मार्शल ने दिया क्योंकि यह इस पूरे विभाग के नेतृत्वकर्ता थे। उन्होंने कहा कि 3250 BC से 2750 BC तक सिंधु घाटी सभ्यता का काल रहा हैं।
लेकिन आपको पता होना चाहिए कि एक पद्धति है कार्बन 14 पद्धति जिसके माध्यम से किसी जीवाश्म की आयु ज्ञात की जाती है। और इसी माध्यम द्वारा जब आयु निकाला गया तो इसे माना गया 2300 BC से 1750 BC और इस पध्दति का सबसे पहले समर्थन भारतीय पुरातत्ववेता डीपी अग्रवाल ने किया था। हालांकि अलग-अलग विद्वानों ने इसके संबंध में अलग-अलग विचार दिए हैं। लेकिन अंतिमतः 2500 से 1700 साल के बीच इस का काल को मुख्य रूप से माना गया। यह एक पैमाना बना जहां ज्यादातर इतिहासकार आपस में सहमत दिखाई देते हैं नहीं तो वैसे इसके काल के संबंध में सभी इतिहासकारों में मतभेद दिखाई देते है।

सिंधु घाटी सभ्यता ऐसा नाम क्यों देना पडा?

प्रारंभ में जितने स्थल खोजे जा रहे थे वह मूल रूप से सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे पाए जा रहे थे। शुरू से एक परंपरा विकसित रही थी कि नील नदी की सभ्यता, ह्वांगहो नदी की सभ्यता तू ऐसा ही माना गया कि भारत में भी यह सभ्यता जो है सिंधु नदी के किनारे ही हैं, इसीलिए इसे यह नाम दे दिया गया। लेकिन बाद में चलकर के ऐसा पाया गया कि यह केवल सिंधु नहीं बल्कि सरस्वती नदी के किनारे भी है, फिर परिणाम स्वरूप से सिंधु एवं सरस्वती की सभ्यता नाम दिया गया। हालांकि यह नाम कुछ इतिहासकारों के बीच ही प्रचलित रहे और पुस्तकों वगैरह में इसे बहुत कम ही जगह दी जाती है।

हड़प्पा सभ्यता :

इतिहास में एक संस्कृति रहीं हैं कि यदि किसी सभ्यता के नामाकरण में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है, तो उस सभ्यता का नामाकारण उस स्थल के नाम पर किया जाएगा जिस स्थल की खुदाई सबसे पहले हूई थी। तो हमने यहां पड़ा था कि 1921 में दयाराम साहनी जी के नेतृत्व में सबसे पहला खोजा गया स्थल हडप्पा था। वर्तमान में यह पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में है और यह हड़प्पा सिंधु घाटी सभ्यता का पहला स्थल था।

सिंधु सभ्यता के निर्माता कौन थे? 

जैसे हम लोग पढ़ते हैं कि वैदिक सभ्यता के निर्माता आर्य रहे थे उसी तरह से यह खोजने का प्रयत्न किया गया कि सिंधु घाटी सभ्यता के निर्माता कौन थे। इस संबंध में जब समस्या आनी शुरू हुई तो, जो विदेशी इतिहासकार उन्होंने विदेशी मत को प्रधानता दी। ज्यादातर भारतीय इतिहासकारों ने और कुछ विदेशी इतिहासकारों ने भी यह माना कि नहीं, सिंधु घाटी सभ्यता के निर्माता भारतीय थे। विदेशी मतवालों ने अपने तर्क रखे कि जिस प्रकार के घर सुमेरिया में पाए जाते हैं उसी प्रकार के घर सिंधु घाटी सभ्यता में पाए जाते हैं। वह भी मोहरों का उपयोग करते थे तो यह भी मोहरों का उपयौग करते थे, और उनकी धार्मिक परंपराएं भारत से मिलती जुलती थी। लेकिन जब स्थानीय मत की बात आई तो उन्होंने भी अपने तर्क रखें कि नहीं दोनों में समान घर जरूर पाए जाते हैं लेकिन नालियों की व्यवस्था अलग अलग थी। दोनों में ईटों के आकार अलग अलग थे, दोनों में मोहरों कि गुणवत्ता अलग-अलग थी। स्थानीय मत को इन्होंने सिद्ध करने का प्रयास किया। राखल दास बनर्जी ने यह तर्क दिया कि सिंधु घाटी सभ्यता के निर्माता कोई और नहीं बल्कि द्रविड़ जाति के लोग थे। इसके अलावा टी. एन. रामचंद्र और लक्ष्मण स्वरूप पुसालकर ने कहा कि नहीं इसके निर्माता आर्य थे हालांकि इस विचार को बहुत कम तवज्जो दी जाती है इसका कारण यह है कि वैदिक सभ्यता के निर्माता आर्य रहे हैं और उनका काल बिल्कुल भी सिंधु घाटी के काल से समान नहीं है। उन्हें ईटों के घर में रहने की जानकारी थी तो फिर वो वैदिक काल में आकर के झोपड़ी में क्यों रहते हैं। तो इसको तो कम ही मत दिया जाता है। सबसे ज्यादा मत इसी को दिया जाता है कि सिंधु घाटी सभ्यता के निर्माता कौन थे, तो द्रविड़ थे।

सिंधु सभ्यता की विशेषताएं :

1) विशेष नगरीय सभ्यता :                                     

भारत की पहली नगरीय सभ्यता यानी, नगरों का जन्म भारत में अगर कभी होता है तो सिंधु घाटी सभ्यता के रूप में होता है और यहीं से सबसे पहले नगरीय स्वरूप का विकास प्रारंभ हो जाता है। नगर की जितनी विशेषताएं थी जैसे पक्के के घर होना, सडके चौड़ी होना, नालियों की व्यवस्था होनी चाहिए इस तरह की सारी सुख सुविधाएं इस सभ्यता में मौजूद थे। मुख्यता जो नगर जो कि व्यापार प्रधान हुआ करते थे वह इस सभ्यता में मौजूद थे।

2) कांस्य युगीन सभ्यता :

जैसे जिस काल में तांबा का उपयोग हुआ तो हम ताम्र युगीन सभ्यता कहते हैं। उसी तरह जिस काल में पत्थर का उपयोग हुआ उस काल को पाषाण सभ्यता कहते हैं। जिस काल में लोहे का ज्यादा उपयोग हुआ उसे लोहा युगीन सभ्यता के रूप में जानते हैं। उसी तरह से सिंधु घाटी सभ्यता में कांस्य का बहुत ज्यादा उपयोग हुआ यही कारण है कि इसे कांस्य युगीन सभ्यता कहा जाता है।

3) आद्य ऐतिहासिक सभ्यता :

आद्य ऐतिहासिक सभ्यता मतलब ऐसी सभ्यता जिसकी लिखित जानकारी मिली है लेकिन उसे पढ़ा नहीं जा सका। इतिहास में तीन प्रकार के शब्दों के उपयोग किए जाते हैं। एक है प्रागैतिहासिक सभ्यता, दूसरा है आद्यऐतिहासिक सभ्यता और तिसरा है इतिहास। प्रागैतिहासिक सभ्यता में वह सभ्यताएं होती है जिनके विषय में ना तो लिखित जानकारी मिली है और ना ही लिखी जानकारी को पढ़ा जा सकता है। जैसे पाषाण काल वह प्रागैतिहासिक काल के अंतर्गत आता हैं। आद्यऐतिहासिक काल में वैसी सभ्यताएं आती है जिनसे लिखित जानकारी मिली है लेकिन उसे पढ़ा नहीं जा सका। तो सिंधु घाटी सभ्यता आद्य ऐतिहासिक सभ्यता है और यहां से जो लिपि मिली थी वह चित्र लिपि थी। कुछ लिपी चित्र के माध्यम से बनाए गए थे और उसे आज भी पढ़ने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन अभी तक इतिहासकार इसमें सफल नहीं हो पाए हैं। जैसे ही उन लिखित स्रोतों को पढ़ लिया जाएगा तो उसे नाम दे दिया जाएगा इतिहास।

3) शांतिप्रिय सभ्यता :

यह एक बहुत बड़ी विशेषता है, ज्यादातर प्राचीन सभ्यताओं में हम लोग यह देखते हैं कि युद्ध एक मुख्य आधार था। किसी भी विषय पर चाहे वह जैसे धार्मिक, राजनीतिक विषय हो उसके लिए युद्ध लड़े जाते थे लेकिन सिंधु घाटी सभ्यता में एक विशेष गुण यह देखने को मिलता है कि इस दौरान लोग शांतिप्रिय थे। यहां किसी भी प्रकार के युद्ध के संबंध में जानकारी नहीं मिलती है। खुदाई के दौरान किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र नहीं मिले हैं जिससे यह अनुमान लगाया जाता है कि यह लोग शांतिप्रिय थे और शांतिपूर्ण रहते थे और एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक व्यवस्था को संचालित करते थे।

4) व्यापार प्रधान सभ्यता :

जितनी भी प्राचीन सभ्यताएं रही है वह ज्यादातर कृषि प्रधान रही। कृषि को विशेष प्रोत्साहन दिया जाता था। कृषि पर ही पूरी सभ्यता टिकी होती थी। जैसे हम लोग वैदिक काल में आकर पढ़ेंगे तो पशुपालन और कृषि ज्यादा प्रमुख थे। इस काल में व्यापार को बहुत प्रधानता दी गई क्योंकि आज भी अगर हम ध्यान दें तो शहरे क्या है, व्यापारिक केंद्र होती है। शहरों में कृषि कार्य नहीं होते हैं, शहरों मूल रुप से व्यापार होते हैं। उसी तरह से सिंधु घाटी सभ्यता के काल में भी शहरे जो थी वह अत्यधिक प्रसिद्ध थी और शहरी व्यापार का एक प्रमुख केंद्र थे। वहां से व्यापार संचालित होते थे और यही कारण है कि सिंधु घाटी सभ्यता को एक व्यापार प्रधान सभ्यता के रूप में देखा जाता है।

5) विस्तृत सभ्यता :

इस सभ्यता का विस्तार बहुत बड़े क्षेत्र में था। जितनी बड़ी सभ्यता मिस्त्र और नील मिलाकर नहीं थी उससे कई गुना ज्यादा बड़ी सभ्यता थी हमारी सिंधु घाटी सभ्यता।

इसके अलावा विभिन्न आधारों को भी हम लोग विशेषता के रूप में पढ सकते हैं जैसे इस समय के राजनीतिक व्यवस्था कैसे थे, आर्थिक व्यवस्था कैसे थे, सामाजिक और सांस्कृतिक कैसे थे।

राजनीतिक :
राजनीतिक में हम लोग विशेष रूप से देखते हैं कि राजनीति का स्वरूप कैसा था राजतंत्रात्मक था कि प्रजातंत्रत्मक था। अभी ही बताया कि इस पूरे सभ्यता के अध्ययन के लिए जो स्रोत उपलब्ध है वह मूल रुप से पुरातात्विक स्रोत है। नतीजन परिणाम यह निकलता है कि इस सभ्यता के संबंध में जो भी जानकारियां हमने इकट्ठा किए हैं वह सब किसी पुरातत्व को देखकर अनुमानित रूप से इकट्ठा किए हैं। तो राजनीतिक जीवन के संबंध में कैसी व्यवस्था थी इसके संबंध में इतिहासकारों में मतभेद है कुछ यह मानते हैं कि पुरोहित या व्यापारी वर्ग ही पूरे सभ्यता का संचालन करते थे। कुछ यह कहते हैं कि प्रजातांत्रिक व्यवस्था थी।

आर्थिक :
आर्थिक में मूल रूप से हम लोगों को पढ़ना है कि कैसे किसी कार्य को शुरू करना पड़ता था। पशुपालन में कौन से पशु थे, यह सारी चीजें आर्थिक क्रिया का प्रमुख अंग बन जाते हैं। व्यापार आर्थिक क्रियाओं का मुख्य अंग था। यहां दोनों व्यापार थे, जैसे की देश के अंदर भी और देश के बाहर भी। तो यह आर्थिक क्रिया का अंग बन जाते हैं।

सामाजिक :
सामाजिक क्रिया में समाज कितने वर्गों में बांटा था? क्योंकि हम लोग वैदिक काल से पड़ेंगे तो हमें यह नजर आएगा कि, समाज चार वर्णो बंटा था इनमें, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र थे। लेकिन यहां पर लिखित जानकारी नहीं है तो हम यह निश्चित रूप से नहीं कह सकते हैं कि यहां पर यह चार वर्ण थे या अलग थे। लेकिन यहां के स्थलों के खुदाई से यह देखा गया है, कि जितने भी नगरे थे वह दो भागों में बैठे हुए थे। पहला भाग उच्च नगर होता था तो दूसरा निम्न नगर होता था। जो उच्च नगर होते तो उनमें बड़े-बड़े घर थे। तो वह विशेष रूप से धनी लोगों के लिए होगा। जो निम्न नगर था उसमें गरीब रहते थे। तो इतना तो तय है कि यहां 2 वर्ग के लोग थे, एक धनी वर्ग और दूसरा गरीब।

सांस्कृतिक :
यहां के लोगों को लिपि का ज्ञान था, इन्हें माप तोल का ज्ञान था, मूर्तिकला का ज्ञान था, बर्तन निर्माण कला का ज्ञान था, धातु कला का ज्ञान था। 

सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार :

सिंधू घाटी सभ्यता का विस्तार भारत के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में लगभग  13,00000 वर्ग किलोमीटर में फैला था और धीरे-धीरे इसके स्थल जैसे-जैसे बढ़ते जा रहे हैं इनका आकार भी बढ़ता जा रहा है।

सिंधु घाटी सभ्यता मुख्य रूप से नीचे दिए गए स्थानों पर स्थित थी,
1.आलमगीरपुर ( उत्तर प्रदेश) - हिंडन नदी के किनारे
2.दायमाबाद (महाराष्ट्र) - गोदावरी नदी के सहयोगी नदियों के किनारे
3.माँदा (जम्मू-कश्मीर) - चिनाब नदी के किनारे
4.सुत्कागेडोर (बलूचिस्तान) - दास्क नदी के किनारे
यह चार स्थान इसके सीमा रेखा का निर्धारण करते हैं। यह सभ्यता पूरब से पश्चिम की ओर लगभग 1600 किमी में फैली है, जबकि उत्तर से दक्षिण की ओर लगभग 1400 किमी में फैली हैं।
इस सभ्यता के जो स्थल खोजे गए हैं वह तीन देशों में प्राप्त होते हैं, जो है भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान।
स्वतंत्रता से पहले जब इसकी खुदाई शुरू हुई तब मात्र इसके 40-50 स्थल ही मिले थे। वर्तमान में इसके लगभग 1500 स्थल खोजे जा चुके हैं। जिसमें सबसे अधिक 900 से अधिक स्थल भारत में और बाकी बचे हुए पाकिस्तान और मात्र दो स्थल अफगानिस्तान में खोजे गए हैं। अगर भारत की ही बात करें तो अभी तक खोजे गए सभी स्थलों में सबसे ज्यादा स्थल गुजरात राज्य में खोजे गए हैं। 





Wednesday, July 22, 2020

Chemical Reactions (रासायनिक अभिक्रिया) : Types Of Chemical Reactions And Chemical Equation

रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction) :

18 वीं और 19 वीं शताब्दी में कुछ वैज्ञानिकों ने रासायनिक अभिक्रियायों के संदर्भ में बुनियादी प्रयोग किए। उन्होंने प्रायोगिक रूप से साबित किया कि रासायनिक अभिक्रिया के दौरान पदार्थ की संरचना बदल जाती है और यह परिवर्तन स्थायी होता है। इसके विपरीत, भौतिक परिवर्तन केवल स्थिति या पदार्थ के रूप में परिवर्तन है, और यह परिवर्तन अक्सर अस्थायी होता है।

                                                                        
अपने दैनिक जीवन में होने वाली कई घटनाओं में आपके द्वारा किए गए भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों के रिकॉर्ड का आप पता लगा सकते हैं। तापमान, दबाव जैसे मापदंडों में बदलाव के कारण भौतिक परिवर्तन होता है। अक्सर भौतिक परिवर्तन प्रतिवर्ती (reversible) होता है। भौतिक परिवर्तन पदार्थ के संगठन के समान ही होता है। जैसे जब बर्फ गर्म होती है, तो यह पानी में बदल जाती है, और जब पानी ठंडा हो जाता है, तो यह बर्फ में बदल जाता है। इसके विपरीत, किसी प्रक्रिया में किसी पदार्थ की संरचना में परिवर्तन को 'रासायनिक परिवर्तन' कहा जाता है। जब हम कहते हैं कि एक प्रक्रिया या घटना एक रासायनिक परिवर्तन है, तो कुछ रासायनिक प्रतिक्रियाएं संबंधित पदार्थ में होती हैं। रासायनिक अभिक्रिया वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा कुछ पदार्थों में रासायनिक बंध विभाजित होते हैं और नए रासायनिक बंध बनते हैं और वह पदार्थ नए पदार्थों में परिवर्तित हो जाते है।

'अभिकारक'(Reactant) :

आबंध (bond) विभाजन द्वारा रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों को 'अभिकारक'(Reactant) कहा जाता है। 

उत्पाद (products) :  

रासायनिक अभिक्रिया के परिणामस्वरूप, नए आबंध बनते हैं और नए बने पदार्थों को 'उत्पाद' कहा जाता है। 

उदाहरण के लिए, 
कार्बन डाइऑक्साइड गैस हवा में कोयले के दहन से बनती है।
C + O2 →  CO2
इस रासायनिक अभिक्रिया में कोयला (कार्बन) और ऑक्सीजन (वायु) अभिकारक  हैं, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड उत्पाद  है।

रासायनिक समीकरण (Chemical Equation) :

सबसे पहले हम एक अभिक्रिया देखते हैं,
सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) और कॉपर सल्फेट (CuSO₄) के जलीय विलयन में जो अभिक्रिया होती है उससे हमें कॉपर हाइड्रॉक्साइड (Cu(OH)₂) अवक्षेप तथा सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄) का विलयन मिलता है। तो हम इस अभिक्रिया को संक्षिप्त रूप में ऐसा लिखेंगे (नीचे इमेज में देखिए), 

तो उपर इमे में जो अभिक्रिया उसे हम शाब्दिक समीकरण कहेंगे। इसी तरह के शाब्दिक समीकरण अभी हम रासायनिक सूत्रों का उपयोग करके लिखेंगे,

NaOH   +   CuSO₄   →   Cu(OH)₂    +   Na₂SO₄

तो इस संक्षिप्त रूप को हम रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं।

रासायनिक समीकरण कैसे लिखते हैं?

अब हम रासायनिक समीकरण में जो संकेत लिखे जाते हैं, उन्हें एक-एक करके देखते हैं:
1. रासायनिक समीकरण लिखते समय, अभिकारक बाईं ओर और उत्पादों को दाईं ओर लिखते हैं। अभिकारक से उत्पाद तक का तीर दोनों के बीच खींचा जाता है। यह तीर रासायनि-क अभिक्रिया को इंगित करता हैं।

2. यदि दो या अधिक अभिकारक या उत्पाद हैं, तो उनके बीच अधिक (+) चिन्ह का उपयोग किया जाता है। जैसे पिछले  समीकरण में अभिकारकों NaOH और CuSO₄ के बीच अधिक (+) का चिन्ह दिखाया है। इसके अलावा Cu(OH)₂
और Na₂SO₄ उत्पादों के बीच अधिक (+) का चिन्ह दिखाया हैं।

3. रासायनिक समीकरणों को अधिक जानकारीपूर्ण बनाने के लिए, समीकरणों में अभिकारकों और उत्पादों की भौतिक अवस्थाओं का उल्लेख किया जाता है। उनके ठोस, द्रव और गैस अवस्थाओं को क्रमश (s), (l), (g) कोष्ठक में लिखते हैं। इसके अलावा, यदि यह एक गैसीय उत्पाद है, तो इसे (g) के बजाय एक ऊपर की ओर तीर द्वारा इंगित किया जा सकता है,"(↑)" और यदि यह एक अघुलनशील स्थिर रूप में बनता है, अर्थात, यदि यह एक अवक्षेपित रूप में बनता है, तो इसे (s) के बजाय नीचे इंगित किए गए तीर के संकेत से लिखा जा सकता है। यदि अभिकारक और उत्पाद जलीय विलयन के रूप में हैं, तो उन्हें जलीय विलयन कहा जाता है और उनके आगे के अक्षर (aq) उनके जलीय विलयन अवस्था को दर्शाते हैं। 
उपर दिए गए इन तीन नियमों के अनुसार हम कुछ उदाहरण देखते हैं,
(1) CuSO4(aq) + Zn(s) → ZnSO4(aq) + Cu(s) 
(2) CaCO3(s) → CaO(s) + CO2(↑)

संतुलित रासायनिक समीकरण :

जिस अभिकारकों में तत्वों के परमाणुओं की संख्या उत्पाद में उन तत्वों के परमाणुओं की संख्या के बराबर प्रतीत होती है, उन तरह के समीकरणो को 'संतुलित समीकरण' कहा जाता है। यदि प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या रासाय-  निक समीकरण के दोनों किनारों पर समान नहीं है, तो ऐसे समीकरण को 'असंतुलित समीकरण' कहा जाता है।

रासायनिक समीकरण संतुलित करने के चरण :
रासायनिक समीकरण संतुलित क्रमशः करते हैं और वह 'प्रयत्न व भूल' सिध्दांत से अच्छी तरह से किया जाता है। 
(1) सबसे पहले हम एक रासायनिक समीकरण लिखेंगे, 

NaOH   +  H2SO4   →   Na2SO4      +      H2O

(2) समीकरण की दोनों तरफ विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की संख्याओं की जाँच करें कि क्या समीकरण संतुलित है या नहीं। ऐसा लगता है कि दोनों तरफ के सभी तत्वों के परमाणु समान नहीं हैं। अर्थात्, समीकरण संतुलित समीकरण नहीं है।


(3) उस यौगिक से संतुलन समीकरण को शुरू करना सुविधा- जनक है जिसमें सबसे अधिक परमाणु हैं, और पहले उस तत्व पर भी विचार करना है जिसके परमाणु दोनों तरफ असमान हैं।


(i) Na2SO4 और H2SO4 इन दोनों यौगिकों में अधिकतम 7 परमाणु प्रत्येक हैं। इनमें से किसी को चुना जा सकता है। हम 
Na2SO4 इस यौगिक को चुनेंगे। संतुलन के लिए सोडियम का चयन करें क्योंकि यौगिक में सोडियम परमाणुओं की संख्या दो तरफ से असमान है। ध्यान दें कि परमाणुओं को संतुलित करते हुए यौगिकों का सूत्र नहीं बदलना चाहिए।
यानी कि , यहां सोडियम परमाणुओं की संख्या को दोगुना करने के लिए सूत्र NaOH को Na2OH में नहीं बदला जा सकता है। इसलिए NaOH को '2' यह गुणक लगाएंगे। अभी समीकरण हम फिरसे लिखेंगे,

2NaOH   +  H2SO4   →   Na2SO4    +   H2O



(ii) दोनों ओर ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के परमाणु अस-मान हैं, इसलिए समीकरण यह दर्शाता है कि यह संतुलित नहीं है। इनमें से हायड्रोजन के परमाणुओं को संतुलित करने के लिए छोटा गुणांक लगेगा इसलिए हम सबसे पहले हायड्रोजन को संतुलित करेंगे।



(iii) हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या को संतुलित करने के लिए गुणांक '2' को उत्पाद H2O पर लागू करें।

2NaOH   +  H2SO4   →   Na2SO4    +   2H2

अब दोनों तरफ की जांच करके हमने यह पाया कि दोनों तरफ के तत्वों के परमाणुओं की संख्या समान हैं। इसलिए यह
रासायनिक समीकरण संतुलित है।

रासायनिक अभिक्रियायों के प्रकार :

1. संश्लेषण अभिक्रिया (Combination Reaction) :

जब कोई अभिक्रिया दो या दो से अधिक अभिकारकों के रासायनिक संयोजन द्वारा एकही उत्पाद का निर्माण करती है, तो उस अभिक्रिया को संश्लेषण अभिक्रिया कहते हैं।
Eg:
  
2Mg      +     O2      →     2 MgO

उपर दिए गए अभिक्रिया में मॅग्नेशियम और ऑक्सीजन का संयोजन होकर सिर्फ मॅग्नेशियम ऑक्साइड यह एक ही उत्पाद तैयार हो रहा।

2. अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction) :

जब कोई अभिक्रिया में एक ही अभिकारक से दो या दो से अधिक उत्पाद मिलते हैं तो उस अभिक्रिया को हम अपघटन अभिक्रिया कहते हैं।
Eg:

2NaCl        →      2Na       +         Cl2

सोडिअम क्लोराइड का अपघटन करके सोडियम और क्लोरीन यह दो उत्पाद मिलते हैं।

3. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction) :

जब एक यौगिक में कम प्रतिक्रियाशील तत्व के आयन को अधिक प्रतिक्रियाशील तत्व के एक अन्य आयन द्वारा विस्था- पित किया जाता है, तो उस रासायनिक अभिक्रिया को 'विस्थापन अभिक्रिया' कहा जाता है।
Eg:

CuSO4(aq) + Fe(s) → FeSO4(aq) + Cu(s)

जब कॉपर सल्फेट के विलयन में लोहे की छोटी-छोटी कील रखी जाती है तो कॉपर सल्फेट का नीला रंग बदल कर हल्का हरा हो जाता है। ऐसा फेरस सल्फेट के निर्माण के कारण होता है। लोहे की कील पर भूरी (blur) परत के रूप में कॉपर हमें मिलता है।


4. दोहरी विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction) :


जब रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारक आयन का आदान-प्रदान करके अवक्षेप का निर्माण करते हैं, तब उस अभिक्रिया को दोहरी विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
Eg

 NaOH   +  H2SO4   →   Na2SO4    +   H2O


उपचयन और अपचयन अभिक्रिया (Oxidation & Reduction Reaction) : 

उपचयन अभिक्रिया (Oxidation Reaction) :

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अभिकारक ऑक्सीजन के साथ संयोजित होता है या वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें हाइड्रोजन का ह्रास जाता है और उत्पाद मिलता है। उसे उप- चयन अभिक्रिया कहते हैं। 
Eg:
(1) 2 Mg       +       O2     →       2MgO    
(2) MgH2                          Mg     +        H2

अपचयन अभिक्रिया (Reduction Reaction) :

जिस अभिक्रिया में अभिकारक हायड्रोजन प्राप्त करता है, उस अभिक्रिया को अपचयन अभिक्रिया कहते हैं। 
Eg :
 CuO   +     H2                     →         Cu     +   H2O